नगर निगम चुनाव प्रचार प्रबंधन
नगर निगम चुनाव तय करते हैं कि भारत के शहर कौन चलाएगा, और ये वार्ड-दर-वार्ड जीते जाते हैं। हम पार्षद उम्मीदवारों और पूरे नगर निगम में चुनाव लड़ रही पार्टियों के लिए पूरा अभियान चलाते हैं: सर्वे, वार्ड योजना, बूथ टीमें, मतदाता संपर्क और मतदान के दिन का संचालन।
- चुनाव कराता है
- राज्य निर्वाचन आयोग
- सीट
- हर वार्ड से एक पार्षद
- कार्यकाल
- 5 साल
- आरक्षण
- एससी/एसटी, पिछड़े वर्ग और कम से कम एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए
- मेयर
- राज्य के हिसाब से सीधे मतदाताओं द्वारा या पार्षदों द्वारा चुना जाता है
नगर निगम चुनाव हर राज्य का राज्य निर्वाचन आयोग कराता है, भारत निर्वाचन आयोग नहीं।
नगर निगम अभियान में किन बातों का सही होना ज़रूरी है
नगर निगम एक-एक वार्ड जीतकर मिलता है
चाहे आप अकेले पार्षद उम्मीदवार हों या हर वार्ड में लड़ रही पार्टी, नतीजा उन वार्ड मुक़ाबलों का जोड़ होता है जो अक्सर कुछ सौ वोटों से तय होते हैं। हर वार्ड के लिए अलग मतदाता सूची, बूथ योजना और स्थानीय एजेंडा चाहिए।
पार्टियों को केंद्रीय वॉर रूम और वार्ड-स्तर पर सहयोग चाहिए
पूरे नगर निगम में चुनाव लड़ रही पार्टी को एक ऐसा कमरा चाहिए जहाँ से हर वार्ड दिखे: सर्वे के आँकड़े, उम्मीदवारों की तैयारी, कितना संपर्क हुआ और बूथों की कवरेज। इसी से संसाधन उन वार्डों में जाते हैं जो सच में जीते जा सकते हैं, न कि उनमें जहाँ से सबसे ज़्यादा शोर आता है।
आरक्षण का रोटेशन पूरा नक्शा बदल देता है
वार्डों का आरक्षण चुनाव-दर-चुनाव बदलता रहता है, इसलिए मौजूदा पार्षदों को अक्सर वार्ड बदलना पड़ता है या परिवार के किसी सदस्य को मैदान में उतारना पड़ता है। नया आरक्षण और नई सीमाएँ जल्दी जान लेने से ही तय होता है कि कौन कहाँ से लड़ेगा।
राष्ट्रीय नारे नहीं, नागरिक मुद्दे
मतदाता पार्षद को नालियों, सड़कों, कूड़ा उठाने, पानी, स्ट्रीट लाइट और इस बात पर परखते हैं कि वह कितनी जल्दी सुनवाई करता है। काम के रिकॉर्ड के साथ एक छोटा, ठोस वार्ड एजेंडा अकेले पार्टी के संदेश से कहीं ज़्यादा असर करता है।
हर राज्य के अपने नियम हैं
खर्च सीमा, प्रचार का समय, नामांकन के नियम और अधिसूचना से मतदान तक की अवधि हर राज्य निर्वाचन आयोग ख़ुद तय करता है। नियमों के पालन की योजना आपके राज्य के नियमों के हिसाब से बनानी होगी, किसी विधानसभा अभियान की नक़ल करके नहीं।
नगर निगम अभियान के लिए हमारी सेवाएँ
नगर निगम चुनाव: उम्मीदवारों के सवाल
भारत में नगर निगम चुनाव कौन कराता है?
नगर निगम चुनाव हर राज्य का राज्य निर्वाचन आयोग कराता है। भारत निर्वाचन आयोग केवल लोकसभा, विधानसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति चुनाव कराता है।
पार्षद का कार्यकाल कितना होता है?
पाँच साल। संविधान के अनुसार नगर निकायों के चुनाव पाँच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले हो जाने चाहिए, हालाँकि व्यवहार में सीमांकन या आरक्षण को लेकर मुक़दमों के कारण कुछ चुनाव टल जाते हैं।
पार्षद उम्मीदवार की खर्च सीमा कितनी है?
यह सीमा राज्य निर्वाचन आयोग तय करता है और यह राज्य व नगर निगम के आकार के हिसाब से अलग-अलग होती है। अपने चुनाव के लिए अपने राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना देखें।
क्या आप पूरे नगर निगम में चुनाव लड़ रही पार्टियों के साथ काम करते हैं?
हाँ। हम नगर निगम के लिए एक केंद्रीय वॉर रूम बनाते हैं और हर वार्ड के उम्मीदवार को सर्वे, मतदाता डेटा, संपर्क अभियान और मतदान के दिन की टीमों से सहयोग देते हैं।
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- मुफ़्त 30 मिनट का सीट आकलन — कोई बाध्यता नहीं
- काम शुरू होने से पहले दायरा और गोपनीयता की शर्तें तय होंगी
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- काम शुरू होने से पहले दायरा और गोपनीयता की शर्तें तय होंगी